राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह में देश के उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए उन्हें विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस दीक्षांत समारोह की सबसे खास उपलब्धि महिला विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन रहा। वर्ष 2024 और 2025 में वितरित कुल 250 गोल्ड मेडल में से 197 पर छात्राओं ने कब्जा जमाया।
उप राष्ट्रपति ने इसे “बदलते भारत की सुखद तस्वीर” बताते हुए कहा कि यह नारी सशक्तिकरण की मजबूत नींव का संकेत है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश की आधारशिला है और इसके विकास के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
उप राष्ट्रपति ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें और नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता के जरिए देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने में योगदान दें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत@2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए युवाओं से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का आह्वान किया।
उप राष्ट्रपति ने युवाओं को नशे से दूर रहने, समाज के प्रति संवेदनशील रहने, विविधता का सम्मान करने और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सहानुभूति और विनम्रता के बिना सफलता अधूरी है।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में ईमानदारी, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम सर्वोपरि होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई और इसे देश के भविष्य के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि नशा एक आग की तरह है, जिससे बचना जरूरी है।
उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं को धैर्य, अनुशासन और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
समारोह में यह भी बताया गया कि राजस्थान विश्वविद्यालय 1947 से ‘सर्विस टू सोसायटी’ के सिद्धांत पर कार्य करता आ रहा है। इस अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं को डिग्री और पदक प्रदान किए।
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